हीरा मोटवानी
चतुराई और परिश्रम का मेल है कृषक खीर सागर पटेल
रायगढ़। कुछ लोगों से मिलकर बहुत प्रसन्नता होती है। जब हम यह पाते हैं कि सामने वाला व्यक्ति सीधा भोला परंतु अपने कार्य में निपुण और परिश्रमी है और उसे जो प्रतिफल मिल रहा है वह अत्यंत ही आश्चर्यजनक है। तो ख़ुशी और बढ़ जाती है। यूं तो अपने जीवन में सभी परिश्रम करते ही हैं परंतु जब उसमें चतुराई का समावेश हो जाता है तो उसेअंग्रेजी की जबान में स्मार्ट वर्क कहते हैं। ऐसा ही कुछ मुझे कृषक खीर सागर पटेल में देखने को मिला अपने आकाशवाणी संवाददाता के रूप में जब मैंने खीर सागर पटेल की स्टोरी अपने संपादक महोदय को बतायी तो उन्होंने कहा कि हमें उनकी आवाज रिकॉर्ड करनी होगी।आप ऐसी व्यवस्था करें कि हम उनकी आवाज रिकॉर्ड कर सकें। तब मैंने खीर सागर पटेल को अपने कार्यालय में आमंत्रित किया। वे अपने साथियों के साथ मेरे कार्यालय पहुंचे और उन्होंने जो कहानी मुझे बतायी वह बहुत ही प्रेरणादायक है।2019 के कृषि क्षेत्र के प्रदेश स्तरीय खूबचंद बघेल कृषि रत्न पुरस्कार विजेता खीर सागर पटेल ने बताया कि उनका बचपन अत्यंत ही गरीबी में बीता है। उनके पिता रामदयाल पटेल एक छोटे किसान थे सारंगढ़ तहसील के ग्राम मानिकपुर में उनका छोटा सा एक कमरे का घर था जिसमें वे अपने माता-पिता सहित दो अन्य भाई-बहन के साथ कुल 5 सदस्यों का परिवार रहता था। उनकी पढ़ाई आठवीं तक हुई है और 5 एकड़ की जमीन में अपनी मेहनत से जो कुछ भी परिवार के सदस्य कमाते थे उसी से उनका गुजर-बसर होता था। धीरे धीरे बच्चे बड़े होते गए और खेती किसानी में ध्यान देने लगे पुश्तैनी काम में उसी परंपरागत तरीके से कार्य करते करते खीर सागर को ऐसा महसूस हुआ यदि इसी ढर्रे पर चलते रहे तो शायद तरक्की की सीढ़ियां कभी नहीं चढ़ पाएंगे। इसलिए कुछ ना कुछ तो नया करना ही होगा।एक दिन वह अपने खेत के पास बैठे थे अचानक उनके दिमाग में पौधा की खेत के किनारे किनारे जो धान लगाई जाती है उसमें ज्यादा पैदावार होती है जबकि बीच में लगाए गए पौधों में पैदावार कम होती है तब उन्हें एहसास हुआ किनारे के पौधे को सही पानी सूर्य का प्रकाश और हवा तीनों ही पर्याप्त मात्रा में मिलती है जबकि बीच के पौधों को यह सुविधा पूरे तौर पर नहीं मिल पाती।बस फिर क्या था खीर सागर ने सबसे पहले अपने 5 एकड़ की भूमि को दुरुस्त करवा कर उसे उन्नत खेती के लायक बनवाया और फिर उसमें अपने अनुभव और अध्ययन के आधार पर श्री विधि से धान की पैदावार की। इस विधि से खेती करने पर उन्हें 1 एकड़ के पीछे 10 क्विंटल अधिक धान प्राप्त होने लगा। यह 10 क्विंटल धान धीरे धीरे पैसों में बदलते गया और घर में खुशहाली का वातावरण निर्मित होते गया इस बचे हुए पैसे से इस किसान परिवार ने धीरे-धीरे अपनी खेती की जमीन बढ़ाते हुए 25 एकड़ कर लिया। साइकिल पर चलने वाला खीर सागर अब मोटरसाइकिल पर चलने लगा एक कमरे का घर अब 16 कमरे के नए मकान में तब्दील हो रहा था खीर सागर ने नए मकान की छत पर सब्जी की खेती के लिए सीमेंट के बोरों में उपयुक्त मिट्टी भरते हुए ईंट के चबूतरे बनाकर उसमें बीज बोकर सब्जी की एक निराली खेती की जिससे उनके परिवार की आय और बढ़ गई।उन्होंने पहले एक गाय खरीदी फिर धीरे-धीरे इस गोधन को भी बढ़ाना शुरू किया सन 2005 से ही उन्होंने अपने घर में गोबर गैस का संयंत्र स्थापित कर लिया था और गाय के गोबर से वे न केवल अपने घर को रोशन करते थे। बल्कि उनका भोजन भी इसी गोबर गैस संयंत्र के माध्यम से बनता था। उन्होंने एक विचार के माध्यम से कि हवा का बहाव पूरब से पश्चिम की ओर होता है और सूर्य का प्रकाश भी पूर्व से पश्चिम की ओर ही चलता है।अपनी जिंदगी को ही बदल डाला।श्री विधि के माध्यम से अपने खेतों में धान की पैदावार करते समय वह एक लाइन धान के बाद दूसरे लाइन धान के बीच में फासला छोड़ते थे जिससे धान के सभी पौधों को बराबर हवा और बराबर धूप और पानी मिलता रहे जिसके कारण उनकी प्रति एकड़ उत्पादन क्षमता 10 क्विंटल बढ़ जाती है। वे गाय का गोबर भी खाद के रूप में इस्तेमाल करने लगे। 25 एकड़ की खेती में चारों तरफ रखवाली करने के लिए उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था परंतु वे हमेशा कुछ नया ही सोचते हैं और उनके घर में भी कृषि से संबंधित सभी आधुनिक मौजूद है उन्होंने दिमाग लगाकर एक बिजली का पुराना पंखा लेकर उनकी ब्लड निकाल दी और ब्लेड की जगह में जंजीरे फिट कर दी और बीच में पंखे को टांग कर उसके चारों ओर खाली तेल के कनस्तर बांध दिए अब जैसे ही पंखा चलता वह जंजीर तेल के कनस्तर से टकराती और खूब जोर-जोर से आवाज होती जिससे पक्षी जानवर और खासकर बंदर उनके फसलों को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। ऐसे आधुनिक काक भगोड़े उन्होंने अपने 25 एकड़ की खेती में कई जगह फिट कर दिए और अब वे उन्हें चलाकर चैन की नींद सोते हैं।आज उनके पास चार मोटरसाइकिल एक बोलेरो गाड़ी है और दोनों भाइयों के 5 बच्चे उच्च शिक्षा के लिए देश के बड़े शहरों में विद्या अध्ययन करने गए हुए हैं। खीर सागर बड़ी सीधाई और मासूमियत से अपनी कहानी मुझे बता रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था कि यदि इतना ही सीधा और इतना ही भोलापन शहरवासियों में आ जाए और शहरवासी भी ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर के मंत्र को अपना लें। और सिर्फ अपने काम से काम रखें और अपने काम को बढ़ाते रहें नए-नए प्रयोग करें और अपने व्यापार व्यवसाय को गति दे तो शायद शहरों में भी कई खीर सागर नई ऊंचाइयों को छू लेंगे उनसे मिलकर मुझे हार्दिक प्रसन्नता महसूस हुई मैं उनके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं और उनसे मिली प्रेरणा से स्वयं भी अपने काम में और तेजी लाने का प्रयास करूंगा
9826177486







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें