सोमवार, 12 जनवरी 2026

 


सिंधी समुदाय का मकर पर्व लाल लोई आज

 
लाल लोई भत में डोई ठारे ठारे खा ...  
 
रायगढ़।  मकर संक्रांति के पूर्व संध्या पर जिस तरह पंजाबी समुदाय लोहड़ी का पर्व मनाता है ठीक उसी तरह सिंधी समुदाय भी इसे लाल लोई और तिरमूरी पर्व के नाम से पूरे उत्साह के साथ मनाता है। अखंड भारत में पंजाब और सिंध  क्षेत्र आपस में मिले होने के कारण यहां के त्योहारों में भी काफी समानता  है बस क्षेत्र के अनुसार उनके नाम बदल गये हैं।
 
इस संबंध में जानकारी देते हुए आरएसएम महिला विंग प्रभारी श्रीमती पूनम मोटवानी ने बताया कि बढ़ते आधुनिक संसाधनों की दौड़ में यह त्यौहार अपनी पौराणिक परंपराओं से हटकर आयोजित हो रहे हैं परंतु उत्साह आज भी पूर्व की तरह है। लाल लोई नकारात्मक शक्तियों के अंत और सकारात्मक शक्तियों के आव्हान का दिन है कहा जाता है कि माघ माह के मध्य में जब सूर्य देव उत्तरायण होते हैं तो भगवत गीता के अनुसार भगवान श्री कृष्ण अपने पूरे वैभव और सभी कलाओं के साथ अपने पूर्ण स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।
 
 पहले लाल लोई के लिए एक बड़े मैदान में गड्ढा खोदा जाता था जो बच्चे स्वयं अपने हाथों से मेहनत कर बनाते थे लेकिन अब मैदान नहीं होने के कारण ईंट का घेरा लगाकर और उसके अंदर गोबर लिपाई करने के बाद लकड़ी का ढेर पिरामिड के आकार में सजाया जाता है।  पहले इस पर्व के लिए बच्चे छत्तीसगढ़ी त्यौहार छेरछेरा की तरह अपने समुदाय के हर घर में जाकर लकड़ी और प्रसाद के पैसे एकत्रित करते थे उस वक्त वे  एक गीत गाते थे , लाल लोई भत में डोई  ठारे ठारे खा पंजणी डींदीअ धीय जमंदय डहड़ी डींदीअ पुट्र जमंदुय। उस वक्त पैसे की वैल्यू थी इसलिए इसका अर्थ यह था की लाललोई  पर सिंधी व्यंजन भत को डोई यानि लकड़ी कि कड़छी से निकाल कर ठंडा करके खाओ और पांच पैसा दोगे तो पुत्री प्राप्त होगी और दस पैसा दोगे तो पुत्र प्राप्त होगा, यह एक आशीर्वाद गीत है ।
 
सिंधी व्यंजन भत  इस त्यौहार का मुख्य व्यंजन होता है जो गेहूं के दलिया, शुद्ध घी, जीरा, काली मिर्च आदि के उपयोग से बनता है और इसमें पानी और गुड़ की मात्रा मिलाई जाती है यह एक मीठा व्यंजन है जो हर घर में प्रसाद के रूप में बनता है । पूरे समाज के लोग इस त्योहार के लिए स्वयं में ही आगे आते हुए बच्चों को पैसे और अन्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं फिर सभी मिलकर शुभ मुहूर्त पर इन लकड़ियों में अग्नि प्रज्वलित करते हैं जिसके लिए गोबर के उपले का उपयोग होता है। तत्पश्चात आरती की थाली सजाकर सूर्य देव और अग्नि देव की आरती की जाती है तथा गाजर, रेवड़ी, नारियल, बुरी नजर से बचने के लिए पीली राई, सफेद तिल,काले तिल मूंगफली और गुड़ मूली  समर्पित करते हैं । तत्पश्चात पल्लव प्रार्थना होती है फिर आयोलाल झूलेलाल की भजन धुन के साथ परिक्रमा की जाती है और अंत में परिवार के लिए पूरे समाज के लिए अग्नि देव से सूर्य देव से प्रार्थना की जाती है कि उनके आने वाले समय में वह उनकी न केवल रक्षा करें बल्कि उन्हें नकारात्मक शक्तियों से बचाएंगे। इसमें कुछ लोग मन्नत के सिक्के भी समर्पित करते हैं जिन्हें दूसरे दिन अग्नि के ठंडी होने के बाद उसे पवित्र लक्की क्वाइन के रूप में लोग अपनी तिजोरी या गल्ले में रखते हैं और छोटे बच्चों को तो गले में इसे ताबीज की तरह बांधकर पहनाया जाता है ।
 
दूसरे दिन प्रसाद के रूप में तिल और मूली को आपस में अड़ोस पड़ोस के घरों में बांटा जाता है और विवाहित बहनों और बेटियों के ससुराल में भी भेजा जाता है यह शुभ शगुन होता है।  हालांकि परंपराएं समय के अनुसार बदलती रहती हैं लेकिन त्यौहार का जो आनंद हर वर्ष दिन प्रतिदिन बढ़ता ही रहता  है यहां यह भी उल्लेखनीय है कि यदि हम अंग्रेजी कैलेंडर को देखें तो वर्ष प्रारंभ के बाद यह पहला त्यौहार रहता है जिसे आध्यात्मिक दृष्टि से अधिमास के अंत और सूर्य के उत्तरायण होने  के लिए मनाते है आज से शुभ और मंगल कार्यों का आरंभ होता है। आप सभी को मकर संक्रांति, लोहड़ी, लाल लोई, तिरमूरी ,पोंगल, बीहू, पर्व  की बहुत-बहुत शुभकामनाएं।
 
पूनम मोटवानी प्रभारी महिला विंग राष्ट्रीय सिन्धी मंच रायगढ़



रविवार, 11 जनवरी 2026

सांसों में घुल रहा है जहर, फिर भी इंसान मौन- हीरा मोटवानी


 



सांसों में घुल रहा है जहर, फिर भी इंसान मौन- हीरा मोटवानी  


जिंदा रहने का हक भी छीना जा रहा 

                रायगढ़(छ ग)। रायगढ़ में प्रदूषण का स्तर इतना बढ़ गया है कि हम अपनी जिंदगी के 10 से 15 वर्ष की कुर्बानी तथाकथित विकास के नाम पर दे रहे हैं। दूसरे शब्दों में हम अपने परिवार के भरण पोषण के लिए मजबूरी वश अपने जीवन की आहुति दे रहे हैं। सैकड़ों वर्षों कि गुलामी के कारण हममें गुलाम मानसिकता इस कदर घर कर गई है की तीन पीढ़ियां जाने के बाद भी हम यह मानते हुए कि अब हमारे कहने से तो कुछ होगा नहीं, कह कर भी क्या फायदा, अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता, इन बड़े लोगों से कौन उलझे, पूरा सिस्टम इनके उंगलियों पर नाचता है, आखिर हमारी सुनेगा कौन, अब जो हमारे बच्चों के भाग्य में होगा वही होगा,अध्याय समाप्त कर लेते हैं।

                कुछ जागरूक लोग बीच-बीच में इस मुद्दे को उठाते हैं तो उन्हें राजनीतिक मुद्दा कहकर इग्नोर किया जाता है। जबकि हम सभी जानते हैं कि वह मुद्दा नहीं बल्कि अकाट्य तथ्य है।  रायगढ़ में PM10 यानी हवा में मौजूद 10 माइक्रोमीटर या उस छोटे आकार के ठोस कण धूल, धुआँ और मिट्टी के कणों के रूप में हमारे नाक और गले से होते हुए फेफड़ों तक पहुंच रहे हैं। वैसे ही PM 2.5 ऐसे छोटे पार्टिकल जो नंगी आंखों से दिखाई नहीं देते जो वाहन और ईंधन तथा उद्योगों में जलने वाले केमिकल से उठे धुएं और गैस के रूप में हमारे शरीर के अंदर सांसों के द्वारा पहुंच रहे हैं।  N02 यानी नाइट्रोजन डाइऑक्साइड वाहनों और कारखानों से उत्सर्जित गैस और N03 नाइट्रोजन ट्राईऑक्साइड जो अत्यंत ही सूक्ष्म पार्टिकल में हवा से ऊपर जाकर अम्लीय वर्षा के रूप में वापस हम पर ही गिरते हैं।  इन सभी से सांस के रोग, हृदय रोग , कैंसर और त्वचा रोग, कुष्ठ रोग, खून के थक्के से बनने वाले रोग हमारे शरीर में घर कर रहे हैं । परंतु न तो सिस्टम को इस बात की चिंता है और ना ही लोकतंत्र के किसी स्तम्भ को , सभी ने इसे मानसिक रूप से स्वीकार कर लिया है।  यदि हम देखें की इनका न्यूनतम वार्षिक औसत कितना होना चाहिए तो PM10 का 60 PM2.5 का 40 और N02 का 40 N03 का 40 होना चाहिए।  परंतु रायगढ़ में यह 120 तक है और मिलूपारा ,छाल ,पूंजीपथरा, कुंजेमुरा क्षेत्र में यह 200 और 78 तक है। विशेषज्ञों की मानें तो यदि PM 2.5,का स्तर  50 तक आ जाए तो बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए ठीक उसी तरह यदि यह 65 होता है तो बुजुर्गों को भी घर के अंदर ही रहना चाहिए लेकिन जिंदगी की जद्दोजहद ने हमें इतना मजबूर कर दिया है कि हम जान हथेली पर लेकर घूम रहे हैं।

                 और उन बच्चों की भी जान दांव पर लगा रहे हैं जिनके लिए हम यह कहते हैं कि हम उनके भविष्य के लिए कमा रहे हैं। अरे जब बच्चे ही नहीं रहेंगे तो फिर उस पैसे का क्या करोगे आखिर हमारे होंठ क्यों सिल दिए गए, क्यों हम मौन है, क्यों हम अपनी बात नहीं रख पाते हैं, हमारे जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं। जब हम जिंदा ही नहीं रहेंगे तो चौड़ी सड़क, लाइब्रेरी ,वन उपवन, इनका क्या करेंगे। भाग्य वश हमें जो जनप्रतिनिधि मिले हैं वे तो स्वयं विद्वान है यदि उनके रहते भी इस समस्या का हल नहीं निकलेगा तो फिर कभी नहीं  निकलेगा।आखिर क्यों उनका सिस्टम प्रदूषण फ़ैलाते उद्योगों पर नकेल नहीं कसता । 
                क्या चंद रुपयों की पेनाल्टी लगाने के बाद यह सब सुधर जाएगा ,नहीं ,जब तक इन उद्योगों में ताले नहीं लगेंगे जब तक इन उद्योगों के प्रबंधन को सजा नहीं होगी तब तक इस पर अंकुश लगाना कठिन है।  एक व्यक्ति के हत्या पर 302 का मुकदमा चलाकर उस अपराधी को उम्र कैद या मौत की सजा होती है।  पर सामूहिक नरसंहार को कोई सजा नहीं।  कितनी बड़ी विडंबना है। आखिर मेरे रायगढ़ का कसूर क्या था केवल इतना ही तो कि हमारी रत्न गर्भा धरती मां अपने अंदर  खनिज भंडार समेटे हुए है। 

                 क्या हम सुरक्षित तरीके से इन प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं कर सकते, क्या पैसा कमाना और अमीरों की सूची में अपना नाम दर्ज कराना उन्हें इस नरसंहार की इजाजत देता है।  शायद नहीं, रायगढ़ वासियों  सोचिएगा जरूर अत्यंत ही चिंताजनक स्थिति बनी हुई है। विपक्ष जितना हो सकता है अपना कर्तव्य पूरा कर रहा है। ऐसे में जनता को भी आगे आना होगा, पहले शासन प्रशासन के साथ बैठ कर इसका हल खोजें, उसके बाद उद्योगपतियों से जाकर बातचीत करें उन्हें आग्रह करें कि वह इंसानियत के नाते प्रदूषण कम करने के उपाय करें। यदि उसके बाद भी कोई हल नहीं निकलता है तो हम न्यायपालिका की शरण में जाएं कहीं से तो हल निकलेगा,कहते हैं न उम्मीद पर दुनिया कायम है।और उम्मीद वर्तमान नेतृत्व से भी है।










हीरा मोटवानी 

सोमवार, 20 मार्च 2023

माईट्रियुंन में देर- जिम्मेदार केर

 




सिन्धी नाटक                                          लेखक -हीरा मोटवानी 

                                                                  रायगढ़ (छ ग )

                                                                 9826177486         


                      माईट्रियुंन में देर- जिम्मेदार केर 


आशा  —  बियो बुधायो भाभी छा हाल आहे। डियो त पालक कटे ठाहे ड़याँव। 


नताशा — हा भाभी मुखे बि कोई कम डियो। 


शीला —- अड़े न आशा नताशा तव्हां पेका घुमण आयुं आहियो या कम करण। कम पंहिजे घर वन्यी कजो हिते त घूमो फिरो आराम कयो। अचो वेही पह्जें भाउ खे  हाल अहवाल डियो। 

 

आशा  — भाउ धंधो पाणी ठीक आहे। एडा डिंह थी वया आहिन कल्याण त जींअ  भुलजि वया आहियो नताशा     वट त वरी बि साल में हिक भेरो वेंदा ही आहियो।


सुशील —-ठीक थी चवीं पई आशा।  नताशा त पासे में चकरभाटा में रहन्दी आहे। सांई लालदास जन जो दर्शन करण वेंदो आहियां त हिन् सां बि मुलाकात थी वेंदी आ। कल्याण परे जो पंध आहे उते वन्य त हफ्तो दुकान बंद करणों पवे थो । पर बिन ट्रिन सालन में  तो वट भी चक्कर लगी वेंदो आ। तव्हां बुधायो तव्हां बई खुश आहियो न।  का परेशानी त कोन्हे।  


आशा — न भाऊ सब सुख आनंद आहिन। भला इहो त बुधायो अनन्या जो वियांह कडहिं था करायो असां इंतज़ार पया था कयूं। भाभी नवां वगा वठी डिन्दी ,नचंदासी ,ट्रपदासी, झुमरियूं पांइदासी ह न भाभी,,, हा हा हा।  


नताशा —---हा भाभीअ  त गहन जो वादो भी कयो आहे। छो भाभी ठीक थी चवा न ,,,हा हा हा।  


पाड़ेवारी —---अदि संभाण त डे ,,,,,,अई तव्हां बई भी आयुं आहियो छा  —-भला का खुश खबरी आहे छा।  


शीला—---न भेण हे बई पेका घुमण आयुं आहिन।  


पाड़ेवारी—--अच्छा मूं समझो त अनन्या जो कम किथे छडायो अथई ,,पर हिक गाल्ह आहे छोकरी अठाविन्हे जी अची थी तई पर तूं  अन्या  माठ करे वेठी आहीं। कमाल आ अलाए निंड्र किंअ थी अचेव  (गहरी साँस ) अन्या केतरो  वेहारिंदीअ छोकरिअ खे । डीसीं थी जमानो कहिड़ो लगो पयो आहे —---तव्हा नथयूँ  समझायोस भाजाई खे —-चंगों भाई मां त हलां थी। 


आशा  —--डिस भाभी ड़ई वयय न ज़ोर जो झटको धीरे सां। 


शीला —- हेड़ा  बुधो था मुखे भी हाणे चिंता थींदी आहे। तव्हां हिंअर फोन करे भाई.साहब खे सड करायो।

 

-(घंटी)

सुशील —-हा भाई साहब मां सुशील , जे टाइम हूजेव त हिंअर घर अचो कम आहे —-जी मेहरबानी —--अचे थो 


डोर बेल

भाई साहब —-राम राम सुशील कहिड़ा हाल आहिन मस मस याद कयो थई।  


सुशील—---बढ़िया बढ़िया ,मालिक जी मेहर, साईं लालदास जन जी कृपा ऐं तव्हां वडण न  जी आसीसा आहे भाई साहब ।


भाई साहब —---बियो बुधाय किंअ याद कयुव । बेबीअ जो कम किथे पक्को कयुव छा। 


सुशील—--- न भाई साहब अन्या तांई को सुठो पसंद वारो कम न मिलयो आहे। गोल्हा लगी पई आहे ,बुधायो को बढ़िया कम।


भाई साहब  —----सुशील मां बिन सालन खां पोइ आयो आहियां अन्या तव्हां जी गोल्हा हले थी पई ? केतरा सुरीला कम तव्हां खे बुधाया हुआ पर तहाँ सभु फेल करे छडिया । मूं बि ब साल मेहनत कई हुई। सुशील  बार जी उमर वधन्दी वन्ये थी पह्जीं शरतुंन ते थोड़ो वरी वीचार कयो। 


सुशील—---न भाई साहब असांजी मांग उहा ई आहे छोकरो सुन्हणो हुजे, पढियल लिखयल हुजे, पैसे वारो घर हुजे ,दर ते मोटर कारयूं बीठयूं हुजन। 


शीला —---ऐं भाई साहब परिवार पण नंढो हुजे छो त गुड़िया रंध पचाव पूरो कोन सीखी आहे। ऐं हुंअ  भी वडन घरन में रोटी पाणी राँधा कंदा आहिन छा चवंदा आहिन ,,,,,कुक,,,,,हा कुक कंदा आहिन। 


भाई साहब —-बेटा अनन्या तुन्हजी भी काई डिमांड आहे। 


अनन्या —-हाँ अंकल मैं चाहती हूं कि बड़ा शहर हो 2-3 मॉल हो कॉन्वेंट स्कूल हो अच्छे अस्पताल हो और घर में कोई रोक-टोक ना हो मुझे कोई टोक दे यह मुझे पसंद नहीं । कपड़े पहनने में कोई बंदिश ना हो स्कूटी कार चलाने पर कोई किच किच ना हो किटी पार्टी वगैरह जाने में छूट हो कुल मिलाकर जिंदगी इंजॉय करनी है यू नो मैं क्या कह रही हूं


भाई साहब —-हा पुट्र मां  सभु समझा थो। टीवी मोबाईल ते डीन्हं गूजारण  ते उन्हें कडहीं  कोई एतराज न हुजे इहा शर्त चवण भुलजी वइंअ छा ? हल अगते बुधाय छोकरो किंअ हुजे ?


अनन्या —--हैंडसम, स्मार्ट, डैशिंग, स्टाइलिश, कपड़े पहनने का शौकीन घूमने फिरने वाला और हां आंखें रितिक जैसी हो तो मजा ही आ जाए क्योंकि आई लव ब्लू आइस, अंग्रेजी बोले तो सोने पर सुहागा। 


 भाई साहब —--अच्छा हुन में इहे सभु खुब्युं हुजन पर कुछ गलत आदतूं  भी हुजन त। 


अनन्या —--जैसे ?


भाई साहब —--जींअ  त शराब ऐं मांसाहार जो शौकीन हुजे सिगरेट पाऊच जी आदत हुजेस। हट ते न वेहि दोस्तन सां घुमंदो हुजे। रात जो पार्टीयूंन मां  देर सां घर अचे ऐं नशे में हुजे त ?



अनन्या —--कोई बात नहीं अंकल इतना तो आजकल चलता है मुझे कोई एतराज नहीं।


भाई साहब —---पर पुट्र नशे में कडहिं हथ खणी छडे या गलत सलत गाल्हाये, झगड़ो करे त ?


अनन्या —- नहीं अंकल अव्वल तो ऐसा होता नहीं है पर होगा तो मैं हैंडल कर लूंगी और थोड़ा बहुत सहना पड़ा तो सह लूंगी आखिर बाकी सब भी तो मिल रहा है ना। बड़े शहरों में ऐसा ही कल्चर होता है यह मैं जानती हूं पर मैं संभाल लूंगी।फिर आप जानते हैं कि मैं कराटे में ब्लैक बेल्ट हूं।  चिंता मुझे नहीं उसे करनी है। 


भाई साहब —- ठीक आहे बेटा हाणें मुखे तव्हां जा विचार पतो पया हाणें तुंह्जी सगाई जल्द थी वेंदी। एहडन  गुणी छोकरन सां त दुनियां भरयल पाई आहे। कमी त सुधरयल छोकरन जी आहे। जिन खे कोई पसंद न कंदो आहे। वेचारा पह्जीं सिधाई ,सनाखत निवड़त जे कारण पोईते रह जी वया। पर हिक गाल्ह बुधाय अगर छोकरो स्मार्ट न हुजे ऋतिक वांगुर अखियुं न हुजन पर बाकी जेको तो ऐं तुंह्जे माउ पीऊ गुण बुधाया ऊहे हुजन  मुहांड्रा  राम पाल वांगुर हुजन त ?


नताशा—-भाई साहब हरु भरु रामपाल त न चवो न। 


अनन्या —-अरे बुआ क्या फर्क पड़ता है वह भी चलेगा अब हर चीज तो नहीं मिलती ना।  आखिर मैं और मेरे शौक मेरी जिंदगी में तो यही मायने रखते हैं ना।  पैसा होगा तो सब अच्छा लगता है पैसा नहीं है तो मेरी खूबसूरती भी किस काम की।  सारा दिन घर में काम करते-करते औरतें बूढ़ी हो जाती हैं पर उनके शौक पूरे नहीं हो पाते।  जमाना बदल गया है इसलिए पहले मैं और मेरे शौक बाकी सब बाद में।  


भाई साहब —----बेटा अगर ससु कडहिं तुहंजी गलतिअ ते नाराज थी तुंह्जी माउ वांगुर थोड़ी छिड़ब डीए त ?


अनन्या —---नहीं अंकल वो सब नहीं चलेगा वो आप पहले ही क्लियर कर लेना मेरे को सास की मचमच  नहीं चाहिए।  आप पहले ही देख लेना सास चंगी हो या फोटो टंगी हो। 


शीला —--हा भाई साहब इहो त मां भी न सहन्दस ,आखिर नूंह धिअ समान हुंदी आहे उन खे कड़ो गाल्हाईण जो मतलब ई कोन्हे। इहो सब पहरयाई डिसी वठजो  


अनंत —---अंकल मेरे भी रिश्ते चलाओ ना मैं भी तो 26 का हो गया हूं मुझे तो दीदी की तरह सेम टू सेम शर्तों पर शादी करनी है। पढ़ी-लिखी स्मार्ट स्टाइलिश स्कूटी कार चलाने वाली दिन भर किट्टी पार्टियां करने वाली आंखें ऐश्वर्या  जैसी हो तो सोने पर सुहागा।

 

शराब बीयर सिगरेट पाउच की शौकीन हो तो भी चलेगा कभी-कभी ड्रग्स भी ले ले तो भी चलेगा आखिर मुझे भी तो लाइफ इंजॉय करनी है और रहा सवाल उसकी सास यानी मेरी मम्मी का तो उन्हें  मैं समझा लूंगा वो  कुछ नहीं बोलेंगी। 


और हां दान दहेज तो हमारे घर में चलता नहीं है।  पर इसका मतलब यह मत समझियेगा कि वह खर्च नहीं करेगी अरे मैं खुद हर महीने उसे पापा से ₹50000 दिलवा दूंगा ताकि वह अपने शौक पूरा करें और खूब इंजॉय करें।


शीला —-- हेंठ तई मुआ ,,,,,चई छातो समझ में अचई थो। छा तोखे हिन् डिंह लाय  पाले पोसे वडो कयो हूयूम त जडहिं असांजा नूंह जे सुख वठण जा डिंह अचन त तूं मँडम वठी आ। हेडाँ  बुधो था हिन् जो वाहयातो गाल्हाईण। 


सुशील—---हाणे हिन् में मुंहजी कहड़ी गलती ,,,,,,चवंदी आहीं न टी बार तोते वया आहिन पोइ हाणे मूड़े छोती निहारीं ,,,,,झूलण जो भउ कर ,,,,,इहे अखियुं डीसी डीसी मां लहकारजी वयो आहियां। तोभां 


अनंत —- इसमें मैंने गलत क्या कहा मम्मी जो आप दीदी के लिए ढूंढ रही हैं वही तो मैंने अपने लिए भी कहा है।  आप हमेशा डबल स्टैंडर्ड की बात करती हैं आपको बहू  चाहिए घर में सभी कामकाज करने वाली पर दीदी को ऐसे घर भेजना चाहती हैं जहां काम ही ना करना पड़े।  आपको बहू  चाहिए कि वह दिन भर मेरी, आपकी और पापा की सेवा करती रहे ना कहीं जाए ना कहीं आए ना किटी पार्टी ना मूवी ना वेस्टर्न कपड़े न स्कूटी कार चलाएं न पलट कर जवाब दे पर दीदी यह सब करें तो आपको कोई एतराज नहीं।  क्या है यह सब।  बचपन से यही तो देखते आ रहे हैं जब हम छोटे थे मेरे सभी दोस्त सिंधी में बात करते थे तब आप हमें हिंदी में बात करने के लिए कहती थी आज जब हम बड़े हो गए हैं और हमें सिंधी  नहीं आती तो आप लोगों को बुरा लगता है। मम्मी  बच्चे मां बाप की कॉपी करते हैं जो देखते हैं सुनते हैं वैसे ही हो जाते हैं आपकी इन्हीं डबल स्टैंडर्ड वाली बातों ने हमारी परेशानी बढ़ाई है समझ में नहीं आता क्या सही और क्या गलत। 


सुशील —--भागनवारी अनंत सही चवे थो तूं वडी गलती करे रही आहीं। चवंदा आहिन त धीउ जो घर कडहिं कडहिं माउ भी फिटाइन्डी आहे। धीउ खे गलत सलत सलाहू डई उन जो मन वाधाए छडयो थई। शुरु में ब्यन खे डीसी उन्हन खे सिंधी न सेख़ारयय , पढण लाइ कान्वेंट स्कूल मोकलयूंनि ,पोइ बाहर हॉस्टल में रखे पढायुनि। घर जा संस्कार त उन्हन खे मिलिया ई न। वरी भी अनंत में ऐतरि समझ त आहे जो गलत खे गलत चवे थो। पर तूं त गलत खे सही साबित करें करण जी कोशिश करे रही आहीं। 


शीला —---तव्हां चुप कयो तव्हां खे दुनियादारिअ जी कहड़ी खबर ,अजु कल्ह सभु इयंई  कंदा आहिन मां कुझ अलग थोड़ी थी कयां। सडयो डिंह पेपर पढ़ो था पर,,,,,,,,हाणे तव्हां खे छा चवां ,,


भाई साहब —---भाभी सुशील ठीक चवे थो अजु मिट्रियुं माईट्रियुं डाढ़ीयूँ डुखयूँ थी पयूं आहिन उन जा कई कारण आहिन उनमे पहरियों कारण असां पह्जन बारन खे संस्कार न डई सघयासिं आधुनिकता जी ड्रुक में पह्जीं बोली न सेखारे सघयसिं। जिन्हन खे सिंधी ई नथी अचे उहे सिंधी संस्कृति किंअ सिखंदा। 


नताशा —---सही गाल्ह आ घर खां बाहर रहन्दा त डिंण वार किंअ डिसन्दा होली, ड्यारी, लाललोई, शिव, एकाणा , थदड़ी, गोगडो, ट्रीजडी, महालक्ष्मी, कारकत, चेट्रीचंड्र ,जणयां, मुंनहण, साठ सुगुन, डिख ड्यन्य मन्य, रामसत जी त उन्हन खे डयांण ई कोन्हे। 


भाईसाहब —-उन्हन खे त बस बर्थडे, वेलेंटाइन डे, क्रिसमस, न्यू ईयर  ई खबर आहे। इन्हींअ करे हू पाण खे सिंधी समझन ई कोन था पोइ ब्यन समाजन में लव मैरिज कन था।  छो त उहा गाल्ह उन्हन खे गलत नथी लगे। बियो कारण त हिन् वक्त 1000 छोकरन जे पोईतान्न 940 छोकरियूं आहिन यानि 1000 मां 60 छोकरा त कुंवारा ई रहन्दा। ट्रियों कारण बारन जूं ख्वाईशूं सभनि खे वडो पैसे वारो घर वडो शहर आधुनिक ऐश ईशरत ब्रांडेड कपडा जूता परफ्यूम ज्वेलरी मंहगी मोबाईल विदेश यात्रा खपे। इन्हे करे बई धुरयूं भटकन पयूं थियूं। तव्हां पाण चइन सालन खां भटको था। आखिर किथे त समझौतो करणों पवंदो न। 


आशा —--हा  भाई साहब गाल्ह त सही आ मां भी चिंता में आहियां मुंहजे घर में भी बार सिंधी समझन त  था पर गाल्हाए नथा सघन। हाणे वरी उन्हन जा बार त समझी भी न सघन्दा। 


भाई साहब —----हाणे भी देर कोन थी आहे सिंधी भाषा विकास परिषद् जे पारां हर शहर में सिंधी सेखारण  जे लाइ मास्तर मुक़र्रर कया वया आहिन जेके बारन सां गडु वडन खे भी सिंधी पढाईन था। ट्रे क्लास (कोर्स) आहिन सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, ऐं एडवांस डिप्लोमा।बारन खे उन में दाखिलो कराये छडयो। 


शीला —----अच्छा हिअ त तमाम सुठि गाल्ह आहे इहो कम त माँ सुभाणे ई कन्दस। पर हाणे मुखे भी चिंता थी पई आहे। भाई साहब हिन् समस्या जो छा समाधान आहे। 


भाई साहब —--हिन् जो हिकु ही समाधान आहे त बारन जी काउंसलिंग याने हिक जगह ते वेहारे उन्हन खे समझाईजे। हुनन जे सवालन जा पूरा जवाब डई हुनन खे संतुष्ट करे मगज़ मां वडे शहर,एं पैसे वारे घर जी भौंरी कढणी पवंदी। असां वडन खे भी पह्जीं सोच खे भी बद्लणों पवंदो। धिअ ऐं पुट्र में फरक बंद करणों पवंदो ताकि गर्भ में धीउरन जी हत्या न थिये इहो वडो पाप आहे । तडहिं छोकरन छोकरियुन जे अनुपात में इहो 60 जो फरक ख़तम थींदो । छोकरियुन वांगुर छोकरन खे भी पढाईंदासी  तडहिं मसलो हल थींदो न त छोकरियूं पढयल ऐं छोकरा हट वाण्या रहजी वेंदा, त मेल किंअ ठहन्दो। 


अनन्या —--आप सभी की बातें सुनकर मुझे भी यह महसूस हो रहा है मैं कुछ गलत ही सोच रही हूं मुझे भी इस पर विचार करना होगा अंकल आप पापा को बताइए कि कौन से रिश्ते मेरे अनुरूप है जिन्हें आप बेहतर समझते हैं।  


भाई साहब —-- मूं वट त खोड़ रिश्ता रायगढ़, खरसिया, सक्ति चांपा नैला कोरबा कटघोरा चकरभाटा मुंगेली बालोद धमतरी दल्ली राजहरा कांकेर जगदलपुर भाटापारा जा आहिन जँहमें  सुधरयल एं  खूबसूरत बार आहिन ऐं नंढन शहरन में अजु भी सिक प्रेम मान मर्यादा निवड़त सनाखत शर्म लिहाज़ शेवा बचयल आहे। असीं अनंत जो रिश्तो भी ईंअ ई गोल्हिन्दासी।  शहर नंढो हुजे या वडो बार संस्कार वान हुजन। पैसो अजु आहे सुभाणे कोन्हे पर जे सच्चाई मर्यादा मेहनत आहे त पैसा वरी अची वेंदा आहिन।अचो सोच बदळ्यूं ऐं पन्हजन बारन जो घर वसायूं।  


                                                   आयोलाल सभई चवो झूलेलाल 



                        नाटक लिखंदड़ —--हीरो मोटवानी मोटवानी कंसल्टेंसी रायगढ़  

                                                            9826177486  


सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

विवाद से विश्वास स्कीम एक समग्र समाधान- अमरेंद्र कुमार






विवाद से विश्वास स्कीम एक समग्र समाधान- अमरेंद्र कुमार


रायगढ़। भारत सरकार द्वारा बजट 2020 के दौरान एक स्कीम विवाद से विश्वास का प्रस्ताव लाया गया है जो शीघ्र ही एक कानून का रूप ले लेगा परंतु इसमें समय कम होने की वजह से आयकर दाताओं तक उसकी पूरी जानकारी पहुंचाने का दायित्व जितना विभाग का है उतना ही आप सभी कर सलाहकार अधिवक्ता और सीए का भी है। करदाता आपकी बातों पर विश्वास करते हैं अतः यह आवश्यक है कि आप इस विश्वास स्कीम को पूरी तरह समझ कर आत्मसात कर लें। उक्त उद्गार बिलासपुर के प्रधान आयकर आयुक्त अमरेंद्र कुमार ने सीए अधिवक्ता कर सलाहकार और करदाताओं की एक महती सभा के दौरान कहे।  उनके साथ संयुक्त आयकर आयुक्त बिलासपुर परिक्षेत्र एक  ए के लस्कर  की गरिमामयी  उपस्थिति मंच पर थी।  प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा कि मैं यह मानता हूं कि मैं जिन 50 लोगों को संबोधित कर रहा हूं वे उन 20 करदाताओं से जुड़े हुए हैं यानी कि मैं 1000 लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहा हूं। अभी तक जो जानकारियां विभाग के पास हैं उसके अनुसार इसकी प्रक्रिया बड़ी सरल है जो प्रकरण अपील, ट्रिब्यूनल, माननीय उच्च न्यायालय,माननीय उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं यदि उसमें करदाता केवल टैक्स की धनराशि अदा कर देता है तो ब्याज शास्ति  और न्यायालयों में दर्ज होने वाले (प्राश्चिक्यूशन) अभियोजन प्रकरणों की समस्त परेशानियों से उसे मुक्ति मिल जाती है।  यदि कोई करदाता केवल ब्याज एवं शास्ति  के लिए अपील में गया है तो उसे केवल आरोपित राशि का 25 प्रतिशत ही अदा करना है इसी तरह यदि आयकर विभाग किसी प्रकरण में अपील में गया है और करदाता उसे इस स्कीम में लाकर लाभ पाना चाहता है तो उसे कुल आरोपित राशि का 50 प्रतिशत ही अदा करना है इस तरह न केवल करदाता और विभाग का समय बचेगा बल्कि लंबित प्रकरणों की संख्या घटेगी और बचे हुए प्रकरणों में तेजी आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्कीम में वे लोग शामिल नहीं होंगे जिनका कर निर्धारण धारा 153 ए एवं धारा 153 सी के तहत किया गया है, तथा वे जिन्हें देश के बाहर से किसी स्त्रोत से आमदनी हुई है और उसे उसने छुपा लिया है या वे जिनके खिलाफ विभिन्न प्रावधानों के तहत पहले से ही न्यायालयीन अभियोजन (प्राश्चिक्यूशन ) के आदेश पारित कर दिए गए हैं ,धारा 90 से जुड़े मामले भी इस स्कीम का फायदा नहीं ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि स्कीम में तिथियों का बड़ा महत्व है जो प्रकरण 31 जनवरी 2020 तक अपील के लिए जा चुके हैं या उसके लिए पात्र हैं केवल वही प्रकरण इसका लाभ ले पाएंगे और जो करदाता 31 मार्च तक इसका लाभ नहीं ले पाएंगे वे 30 जून तक अतिरिक्त 10% शुल्क देकर इसका लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने सदन से पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के उत्तर दिए कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों के पुष्पगुच्छ से स्वागत और आयकर अधिकारी वार्ड 1 सुजीत विश्वास के स्वागत भाषण से हुआ  सुजीत विश्वास ने कहा कि विभाग द्वारा इस स्कीम के अंतर्गत जो प्रावधान किए गए हैं वे बेहद पारदर्शी हैं और इसका लाभ उठाना चाहिए।  आयकर प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल ने कहा कि वे एवं उनके तमाम साथी विभाग के इस स्कीम के तहत प्रत्येक कैंप जो विभाग द्वारा आयोजित होंगे उसमें अपनी निशुल्क सेवाएं प्रदान करेंगे। सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि पूर्व में भी सर्विस टैक्स विभाग द्वारा इस प्रकार की स्कीम लाई गई थी जिसका लाभ बहुत लोगों ने उठाया इससे समय भी बचेगा और लाखों करोड़ों रुपए राजस्व बढ़ने से विकास कार्यों में खर्च होंगे। आयकर प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के सचिव हीरा मोटवानी ने कहा कि विभाग द्वारा लाई गई यह स्कीम  चिंता दूर कर सुकून देने वाली है हम सभी कर विशेषज्ञों को करदाताओं की शंका समाधान करके उन्हें प्रेरित करना चाहिए कि वह इस स्कीम का लाभ अवश्य लें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सीए अधिवक्ता आयकर सलाहकार ,आयकरदाता विभागीय अधिकारी कर्मचारी गण उपस्थित थे। 

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

आंकड़ों की बाजीगरी के अलावा कुछ नया नहीं है बजट में -चेंबर 
पहले दिखाये छूट के ख्वाब और नीचे लिख दिया शर्तें लागू 
रायगढ़। आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स रायगढ़ के महामंत्री हीरा मोटवानी ने कहा कि इस बजट ने नया कुछ तो दिया नहीं बल्कि ऐसा भ्रम पैदा कर दिया है कि लोग इसी में उलझ कर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार बजट पर टकटकी लगाए इंतजार करता है कि जो वस्तुएं वह इस्तेमाल करता है वह कुछ सस्ती होंगी तथा विभिन्न टैक्स में कुछ राहत मिलेगी जिससे उसकी सालाना आमदनी में से कुछ हिस्सा बचेगा जिसे वह अपने अधूरे सपनों को पूरा करने में लगाएगा। परंतु ऐसा हुआ नहीं आयकर के दो स्लैब बना दिए गए और नीचे लिख दिया गया शर्तें लागू अब यदि इन शर्तों को पूरा किया जाता है तो एक बड़ा तबका जितना आयकर पहले देता था उससे कुछ न कुछ ज्यादा ही देगा क्यों कि देश में वर्षों से बचत को बढ़ावा देने के लिए आयकर की छूट को विभिन्न योजनाओं के साथ जोड़कर लागू किया जाता था जिससे न केवल बचत को प्रोत्साहन मिलता था बल्कि परिवार को आड़े वक्त में यह बचत काम आती थी। परंतु नए स्लैब ने इस धारणा को तोड़ने का काम कर दिया है।उल्लेखनीय है कि वर्तमान में केवल 13 प्रतिशत  लोग ही इंश्योर्ड यानी बीमित है और लगभग 7 प्रतिशत  लोग ही स्वेच्छा से बचत करते हैं शेष बचत केवल टैक्स छूट के नाम पर ही आती थी अतः ऐसे लोग जो बचत पर विश्वास नहीं रखते उनके लिए नया  स्लैब फायदेमंद है और जो लोग बचत पर विश्वास रखते हैं और बरसों से प्लानिंग करते हुए चल रहे हैं उनके लिए पुराना स्लैब ही फायदेमंद रहेगा। उन्होंने कहा कि नई कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए कारपोरेट टैक्स को कम करना और  लघु उद्योगों को कर्ज देने की नई स्कीम की घोषणा तथा विवादास्पद टैक्स प्रकरणों में ब्याज में पेनल्टी की छूट स्वागत योग्य है परंतु आईडीबीआई और एलआईसी की हिस्सेदारी बेचना एक गलत निर्णय हो सकता है और इसे हम दूरगामी परिणाम के रूप में इन दोनों ही कंपनियों को निजी हाथों में जाने की शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बैंक जमा पर बीमा के द्वारा 100000 की गारंटी को 500000 करने का स्वागत करते हैं। स्वास्थ्य कृषि बिजली पानी सड़क आवागमन के साधन और नागरिकों के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना तो हर सरकार का कर्तव्य है इसमें कुछ भी नया नहीं है। इसी बजट में महंगाई को कम करने की उम्मीद को भी खत्म कर दिया है सरकार ने स्वयं माना है कि जीडीपी की दर 6 प्रतिशत  से ऊपर नहीं हो पाएगी अतः यह कहा जा सकता है कि आने वाला साल उसी तरह से बीतेगा जैसा कि हम पिछले दो-तीन सालों से देख रहे हैं ग्लोबल मंदी की छाया में आंकड़ों की बाजीगरी के अलावा कुछ उम्मीद करना भी बेमानी था। मंदी को दूर करने के कोई उपाय नहीं दिखे परंतु एक वर्ष के बाद हम फिर से उम्मीद कर सकते हैं कि जब अगला बजट आएगा तब शायद व्यापार जगत और आम नागरिकों की परेशानी का सुखद अंत होगा। 

रविवार, 8 दिसंबर 2019

डेंगू का लार्वा मिलने पर नागरिकों के ऊपर जुर्माना हास्याष्पद




                         डेंगू का लार्वा मिलने पर नागरिकों के ऊपर जुर्माना हास्याष्पद 






आपके शहर में सड़कों पर गड्ढे हैं और आप उन गड्ढों में दुर्घटना वश गिर जाएं और आप पर जुर्माना कर दिया जावे  कि आप देख कर नहीं चले और आप ने चोट खाई  जिससे प्रशासन की कमजोरी उजागर हो गयी इस वजह से आप पर जुर्माना किया जाता है। या फिर आप किसी अंधेरी सड़क से जा रहे हैं और आप किसी लूट की वारदात के शिकार हो जाते हैं और विद्युत विभाग वह पुलिस विभाग आप पर इस बात के लिए जुर्माना कर दे कि आपको जरूरत क्या थी अंधेरी सड़क से जाने की आपने हमें परेशान किया इसके लिए आप पर जुर्माना लगाया जाता है।  पहले उदाहरण में आप चोट खाकर गिरे हैं और अस्पताल में इलाज करा रहे हैं हजारों रुपए इलाज पर लग चुके हैं अब जुर्माने की राशि पटानी है , दूसरे उदाहरण में लुटेरों ने आपका पूरा माल असबाब छीन लिया है और आपको चोट भी पहुंचाई है आप अपने जीवन भर की पूंजी लूट जाने के बाद भी अब जुर्माना भर रहे हैं। क्या यह दोनों उदाहरण आपके गले से नीचे उतरते हैं शायद नहीं। 

आपको लगेगा कि मैं किसी सभ्य और संविधान को मानने वाले समाज में रह रहा हूं या अंधेर नगरी में रह रहा हूं। परंतु यह सच करके दिखाया है रायगढ़ छत्तीसगढ़ के नगर निगम ने उन्होंने डेंगू से परेशान जनता को चुप कराने के उद्देश्य से उनके घरों से और आसपास से लार्वा मिलने पर जुर्माना लगाना शुरू कर दिया है ताकि कोई यह ना कह सके कि मैं निगम के कारगुजारी , निगम की हठधर्मिता से या निगम के अव्यवहारिक क्रियाकलापों और निकम्मेपन के कारण बीमार हुआ।

निगम के अनुसार रायगढ़ की जनता ने इस बार अपने अपने घरों में डेंगू के मच्छरों का पालन केंद्र खोला हुआ है और यह लोग बीमार नहीं होते यह बीमारी का नाटक करते हैं और अस्पतालों में जाकर भर्ती होते हैं जबरदस्ती स्वयं को खून चढ़ाते हैं डॉक्टरों को फालतू में पैसे देते हैं और अपने घरवालों को परेशान करके अपना मनोरंजन करते हैं और बेचारे सीधे साधे भोले भाले प्रशासनिक अधिकारियों स्वास्थ्य अधिकारियों और मेहनत कश निगम के अधिकारियों को परेशान करने का काम करते हैं ऐसे लोगों पर न केवल जुर्माना लगाना चाहिए बल्कि उन्हें जेल भी भेज देना चाहिए। ऐसा लगता है कि हम अंग्रेजों के जमाने में पहुंच गए हैं और अब यदि आप शासन को या शासन के किसी भी नुमाइंदे के खिलाफ कोई भी आवाज उठाते हैं  तो आपको न केवल जुर्माना देना पड़ेगा बल्कि हो सकता है आपको जेल भी भेज दिया जाए। 

 ऐसा लगता है कि रायगढ़ नगर निगम में कोई लाल बुझक्कड़ आ गया है जो आने वाले दिनों में रायगढ़ वासियों पर कई जुल्मों सितम फिर से ढाने के लिए आमदा है और बेचैन हो रहा है।  लाल बुझक्कड़ कुछ भी कर सकता है उसने पहले भी यह साबित किया है। लेकिन अब ऐसे में आम जनता को जागरूक तो होना ही होगा और न केवल निगम बल्कि शासन प्रशासन में भी इस प्रकार के लाल बुझकड़ों की टीम के खिलाफ आवाज उठानी होगी सारे उल्टे सीधे गैरकानूनी काम करने वाले तथाकथित यह लोक सेवक जब भी अनपढ़ और असहाय मानते हुए जनता पर कोई क्रूर कार्यवाही करें तो उसके खिलाफ आवाज बुलंद करना होगा।  

रायगढ़ में कई आरटीआई एक्टिविस्ट है जो इन लाल बुझक्कड़ के खिलाफ उनकी निजी जानकारियां एकत्रित कर सकते हैं। और यदि इन लाल बुझक्कड़ों  की निजी जानकारियां एक जगह एकत्रित हो जाएं तो इन लोक सेवकों को यह संदेश पहुंच जाएगा कि अब हमारा तोता पिंजरे में नहीं बल्कि जनता के हाथ में आ चुका है और हमने अगर एक भी गलत काम किया तो जनता तोते की मुंडी मरोड़ देगी यदि हम इस तरीके से सामने नहीं आएंगे तो हमें अंग्रेजी हुकूमत की तरह फिर से गुलाम बनकर रहना पड़ेगा।

अभी ठण्ड बढ़ने से डेंगू मरीजों में कमी आयी है। पर फिर भी इसे नजर अंदाज़ न करें। 

शुक्रवार, 22 नवंबर 2019

नमस्कार दोस्तों रायगढ़ में अभी डेंगू का कहर बहुत ही तेजी से बढ़ रहा है। शासन की तरफ से जो कदम उठाए जा रहे हैं उसके अलावा हमें भी अपने आसपास अपनी जागरूकता से कुछ कदम उठाने होंगे। अपने आसपास के नालियों में जला हुआ मोबिल डालें यदि मिट्टी का तेल उपलब्ध हो तो मिट्टी का तेल भी डालें साथ ही दिन भर ऑल आउट या ऐसा ही कोई प्रोडक्ट जो आपको पसंद हो उसका उपयोग अवश्य करें। ख्याल रखें कि डेंगू का मादा मच्छर सुबह में ज्यादा ताकतवर होता है। अतः अपने आसपास साफ पानी जमा न होने दें यह भी ध्यान रखें कि आपके घर के पीछे या बगल में जो नाली या नाला बह रहा है उसमें भी पानी का जमाव न होने पाए। पानी बहता रहना चाहिए मित्रों डेंगू होने के बाद चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आपको अपना इलाज कराते रहना चाहिए परंतु फिर भी एहतियात के तौर पर आयुर्वेद के बताए हुए कुछ नुस्खे को अमल में लाना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। कृपया स्वयं भी बचें और अपने बच्चों को भी सावधानीपूर्वक इस बीमारी से बचाएं। अपना खान-पान ऐसा रखें जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती रहे। मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि जिस तरह अभी तक लगभग 125 मरीजों में से कोई भी हमसे नहीं बिछड़ा है। ऐसा ही ईश्वर का आशीर्वाद हमें प्राप्त होता रहे और हमारा कोई भी अपना हमसे ना बिछड़े। कृपया इसे हल्के में ना लें और अपनी सावधानी और अपनी जागरूकता से अपने परिवार की रक्षा करें।