सोमवार, 24 फ़रवरी 2020

विवाद से विश्वास स्कीम एक समग्र समाधान- अमरेंद्र कुमार






विवाद से विश्वास स्कीम एक समग्र समाधान- अमरेंद्र कुमार


रायगढ़। भारत सरकार द्वारा बजट 2020 के दौरान एक स्कीम विवाद से विश्वास का प्रस्ताव लाया गया है जो शीघ्र ही एक कानून का रूप ले लेगा परंतु इसमें समय कम होने की वजह से आयकर दाताओं तक उसकी पूरी जानकारी पहुंचाने का दायित्व जितना विभाग का है उतना ही आप सभी कर सलाहकार अधिवक्ता और सीए का भी है। करदाता आपकी बातों पर विश्वास करते हैं अतः यह आवश्यक है कि आप इस विश्वास स्कीम को पूरी तरह समझ कर आत्मसात कर लें। उक्त उद्गार बिलासपुर के प्रधान आयकर आयुक्त अमरेंद्र कुमार ने सीए अधिवक्ता कर सलाहकार और करदाताओं की एक महती सभा के दौरान कहे।  उनके साथ संयुक्त आयकर आयुक्त बिलासपुर परिक्षेत्र एक  ए के लस्कर  की गरिमामयी  उपस्थिति मंच पर थी।  प्रधान आयकर आयुक्त ने कहा कि मैं यह मानता हूं कि मैं जिन 50 लोगों को संबोधित कर रहा हूं वे उन 20 करदाताओं से जुड़े हुए हैं यानी कि मैं 1000 लोगों तक अपनी बात पहुंचा रहा हूं। अभी तक जो जानकारियां विभाग के पास हैं उसके अनुसार इसकी प्रक्रिया बड़ी सरल है जो प्रकरण अपील, ट्रिब्यूनल, माननीय उच्च न्यायालय,माननीय उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं यदि उसमें करदाता केवल टैक्स की धनराशि अदा कर देता है तो ब्याज शास्ति  और न्यायालयों में दर्ज होने वाले (प्राश्चिक्यूशन) अभियोजन प्रकरणों की समस्त परेशानियों से उसे मुक्ति मिल जाती है।  यदि कोई करदाता केवल ब्याज एवं शास्ति  के लिए अपील में गया है तो उसे केवल आरोपित राशि का 25 प्रतिशत ही अदा करना है इसी तरह यदि आयकर विभाग किसी प्रकरण में अपील में गया है और करदाता उसे इस स्कीम में लाकर लाभ पाना चाहता है तो उसे कुल आरोपित राशि का 50 प्रतिशत ही अदा करना है इस तरह न केवल करदाता और विभाग का समय बचेगा बल्कि लंबित प्रकरणों की संख्या घटेगी और बचे हुए प्रकरणों में तेजी आएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस स्कीम में वे लोग शामिल नहीं होंगे जिनका कर निर्धारण धारा 153 ए एवं धारा 153 सी के तहत किया गया है, तथा वे जिन्हें देश के बाहर से किसी स्त्रोत से आमदनी हुई है और उसे उसने छुपा लिया है या वे जिनके खिलाफ विभिन्न प्रावधानों के तहत पहले से ही न्यायालयीन अभियोजन (प्राश्चिक्यूशन ) के आदेश पारित कर दिए गए हैं ,धारा 90 से जुड़े मामले भी इस स्कीम का फायदा नहीं ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि स्कीम में तिथियों का बड़ा महत्व है जो प्रकरण 31 जनवरी 2020 तक अपील के लिए जा चुके हैं या उसके लिए पात्र हैं केवल वही प्रकरण इसका लाभ ले पाएंगे और जो करदाता 31 मार्च तक इसका लाभ नहीं ले पाएंगे वे 30 जून तक अतिरिक्त 10% शुल्क देकर इसका लाभ उठा पाएंगे। उन्होंने सदन से पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों के उत्तर दिए कार्यक्रम का आरंभ अतिथियों के पुष्पगुच्छ से स्वागत और आयकर अधिकारी वार्ड 1 सुजीत विश्वास के स्वागत भाषण से हुआ  सुजीत विश्वास ने कहा कि विभाग द्वारा इस स्कीम के अंतर्गत जो प्रावधान किए गए हैं वे बेहद पारदर्शी हैं और इसका लाभ उठाना चाहिए।  आयकर प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के अध्यक्ष बाबूलाल अग्रवाल ने कहा कि वे एवं उनके तमाम साथी विभाग के इस स्कीम के तहत प्रत्येक कैंप जो विभाग द्वारा आयोजित होंगे उसमें अपनी निशुल्क सेवाएं प्रदान करेंगे। सीए एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय सोनी ने कहा कि पूर्व में भी सर्विस टैक्स विभाग द्वारा इस प्रकार की स्कीम लाई गई थी जिसका लाभ बहुत लोगों ने उठाया इससे समय भी बचेगा और लाखों करोड़ों रुपए राजस्व बढ़ने से विकास कार्यों में खर्च होंगे। आयकर प्रैक्टिशनर एसोसिएशन के सचिव हीरा मोटवानी ने कहा कि विभाग द्वारा लाई गई यह स्कीम  चिंता दूर कर सुकून देने वाली है हम सभी कर विशेषज्ञों को करदाताओं की शंका समाधान करके उन्हें प्रेरित करना चाहिए कि वह इस स्कीम का लाभ अवश्य लें। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सीए अधिवक्ता आयकर सलाहकार ,आयकरदाता विभागीय अधिकारी कर्मचारी गण उपस्थित थे। 

शनिवार, 1 फ़रवरी 2020

आंकड़ों की बाजीगरी के अलावा कुछ नया नहीं है बजट में -चेंबर 
पहले दिखाये छूट के ख्वाब और नीचे लिख दिया शर्तें लागू 
रायगढ़। आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स रायगढ़ के महामंत्री हीरा मोटवानी ने कहा कि इस बजट ने नया कुछ तो दिया नहीं बल्कि ऐसा भ्रम पैदा कर दिया है कि लोग इसी में उलझ कर रह जाएंगे। उन्होंने कहा कि एक मध्यमवर्गीय परिवार बजट पर टकटकी लगाए इंतजार करता है कि जो वस्तुएं वह इस्तेमाल करता है वह कुछ सस्ती होंगी तथा विभिन्न टैक्स में कुछ राहत मिलेगी जिससे उसकी सालाना आमदनी में से कुछ हिस्सा बचेगा जिसे वह अपने अधूरे सपनों को पूरा करने में लगाएगा। परंतु ऐसा हुआ नहीं आयकर के दो स्लैब बना दिए गए और नीचे लिख दिया गया शर्तें लागू अब यदि इन शर्तों को पूरा किया जाता है तो एक बड़ा तबका जितना आयकर पहले देता था उससे कुछ न कुछ ज्यादा ही देगा क्यों कि देश में वर्षों से बचत को बढ़ावा देने के लिए आयकर की छूट को विभिन्न योजनाओं के साथ जोड़कर लागू किया जाता था जिससे न केवल बचत को प्रोत्साहन मिलता था बल्कि परिवार को आड़े वक्त में यह बचत काम आती थी। परंतु नए स्लैब ने इस धारणा को तोड़ने का काम कर दिया है।उल्लेखनीय है कि वर्तमान में केवल 13 प्रतिशत  लोग ही इंश्योर्ड यानी बीमित है और लगभग 7 प्रतिशत  लोग ही स्वेच्छा से बचत करते हैं शेष बचत केवल टैक्स छूट के नाम पर ही आती थी अतः ऐसे लोग जो बचत पर विश्वास नहीं रखते उनके लिए नया  स्लैब फायदेमंद है और जो लोग बचत पर विश्वास रखते हैं और बरसों से प्लानिंग करते हुए चल रहे हैं उनके लिए पुराना स्लैब ही फायदेमंद रहेगा। उन्होंने कहा कि नई कंपनियों को प्रोत्साहन देने के लिए कारपोरेट टैक्स को कम करना और  लघु उद्योगों को कर्ज देने की नई स्कीम की घोषणा तथा विवादास्पद टैक्स प्रकरणों में ब्याज में पेनल्टी की छूट स्वागत योग्य है परंतु आईडीबीआई और एलआईसी की हिस्सेदारी बेचना एक गलत निर्णय हो सकता है और इसे हम दूरगामी परिणाम के रूप में इन दोनों ही कंपनियों को निजी हाथों में जाने की शुरुआत कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बैंक जमा पर बीमा के द्वारा 100000 की गारंटी को 500000 करने का स्वागत करते हैं। स्वास्थ्य कृषि बिजली पानी सड़क आवागमन के साधन और नागरिकों के मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति करना तो हर सरकार का कर्तव्य है इसमें कुछ भी नया नहीं है। इसी बजट में महंगाई को कम करने की उम्मीद को भी खत्म कर दिया है सरकार ने स्वयं माना है कि जीडीपी की दर 6 प्रतिशत  से ऊपर नहीं हो पाएगी अतः यह कहा जा सकता है कि आने वाला साल उसी तरह से बीतेगा जैसा कि हम पिछले दो-तीन सालों से देख रहे हैं ग्लोबल मंदी की छाया में आंकड़ों की बाजीगरी के अलावा कुछ उम्मीद करना भी बेमानी था। मंदी को दूर करने के कोई उपाय नहीं दिखे परंतु एक वर्ष के बाद हम फिर से उम्मीद कर सकते हैं कि जब अगला बजट आएगा तब शायद व्यापार जगत और आम नागरिकों की परेशानी का सुखद अंत होगा।